जन प्रहार ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर पिटकुल एमडी को तत्काल हटाने और कैग जांच की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
देहरादून। जन प्रहार उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन को लेकर राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्य सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पिटकुल एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। उक्त आदेश में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के प्रबंध निदेशक प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया गया है। जन प्रहार की संयोजक सुजाता पॉल ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्ति निरस्त किए जाने के बावजूद यदि संबंधित अधिकारी पद पर बने रहते हैं, तो यह न केवल न्यायालय की भावना के विपरीत है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
संस्था ने मांग की है कि प्रकाश चंद्र ध्यानी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए। उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए सभी वित्तीय एवं प्रशासनिक निर्णयों की स्वतंत्र जांच कराई जाए। यह जांच भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से कराई जाए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर जनता के सामने रखी जाए।
जन प्रहार के सह संयोजक पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि यह मामला पिटकुल के एमडी प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति का ही नही, बल्कि उनके पद पर लगातार कार्यरत रह कर सामान्य रूप से कार्य करने से शासन की पारदर्शिता, नियमों के पालन और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़े सवालों को खड़ा करता है। केस की पक्षकार दीप्ति पोखरियाल ने सवाल उठाया कि सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार ने अब तक एमडी का चार्ज प्रकाश चंद्र ध्यानी से क्यों नही लिया है। प्रदेश प्रवक्ता जन प्रहार रविंद्र सिंह गुसाईं ने कहा कि सरकार ऐसे अधिकारी को क्यों बचाना चाहती है जिनके खिलाफ उच्च न्यायालय तक आदेश दे चुकी है। मुख्य सचिव उत्तराखंड शासन आनंद बर्धन ने जनप्रहर के प्रतिनिधिमंडल को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जन प्रहार संयोजक सुजाता पॉल सहसंयोजक पंकज सिंह क्षेत्री, रविंद्र सिंह गुसाईं एवं दीप्ति पोखरियाल मौजूद रहीं। संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो जन प्रहार लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्वक आंदोलन करेगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी उत्तराखंड शासन की होगी।
