केदारनाथ यात्रा पर निकले पांडव, भावुक हुए भक्त

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रुद्रप्रयाग। भरदार क्षेत्र के सेम गांव में चल रहे पांडव नृत्य का फल वितरण के साथ समापन हुआ। पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों के साथ नृत्य करने के बाद भगवान नारायण ने भक्तों को प्रसाद वितरण किया। अंत में देव निशानों व पांडवों का विदाई का पल हर किसी को भावुक कर गया। ग्रामीण देव निशानों को बद्री विशाल के मूल मंदिर स्वीली तक छोड़ने गए।
गत् 26 नवम्बर से ग्राम पंचायत स्वीली के राजस्व गांव सेम में पांडव नृत्य शुरू हुआ था। पुजारी कीर्तिराम डिमरी ने भगवान बद्री विशाल की विशेष पूजा-अर्चना के बाद भोग लगाया। जिसके बाद पांडवों के अस्त्र-शस्त्रों की भी विशेष पूजा अर्चना की गई। पहले तो ढोल दमऊ की थाप पर पांडवों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी खूब नृत्य किया। बाद में पांडवों ने ही अस्त्र-शस्त्रों के साथ नृत्य कर दर्शकों को खूब आनंदित किया। भगवान नारायण के पश््रव समेत सभी पांडवों ने अंत में भक्तों के बीच फल फेंककर प्रसाद वितरण किया। इस दौरान भक्तों ने बद्री विशाल एवं नागराजा के दर्शन कर अपनी भेंट भी अर्पित की। अंत में पांडवों एवं देवी-देवताओं के निशानों की विदाई का दृश्य सभी भक्तों को भावुक कर गया। अंत में पांडवों एवं देव निशानों की विदाई भावुक क्षणों के साथ की गई तथा धियाणियों एवं ग्रामीणों की आंखे भर आई। इस दौरान भक्तों के जयकारों के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
इससे पूर्व गत रविवार रात्रि को सिरोता के अवसर पर रातभर अस्त्र-शस्त्रो के साथ पांडव नृत्य चला। जिसमें गैंडे का कौथिग आकर्षण का केन्द्र बना रहा। पांडवों के केदारनाथ यात्रा का दृश्य काफी मार्मिक रहा। पांडवों पश्वा ने भावुकता के साथ एक दूसरे को गले लगाकर अगले वर्ष फिर मिलने का वादा किया। पांडव नृत्य देखने के लिए दरमोला, डुंग्री, स्वीली, सेम, जवाड़ी, रौठिया, मेदनपुर से बड़ी संख्या भक्तजन उपस्थित थे। पांडव लीला का संचालन प्रसिद्ध कथावाचक डॉ शशांक डिमरी ने किया। इस मौके पर पांडव लीला समिति के अध्यक्ष डॉ हरिशंकर डिमरी, प्रसिद्ध कथावाचक डॉ शशांक डिमरी, कोषाध्यक्ष सुनील डिमरी, उपाध्यक्ष जयंती प्रसाद डिमरी, गिरीश डिमरी, कृष्णानंद डिमरी, भगवती प्रसाद डिमरी, अनिल डिमरी, हरि प्रसाद, विकास डिमरी, वेणी प्रसाद डिमरी, कर्नल देवी प्रसाद डिमरी, तुंगेश्वर डिमरी, सुनील डिमरी, हर्षपति डिमरी, पशुपति डिमरी, भरदार जनजागरूकता मंच के अध्यक्ष एलपी डिमरी, नीलकंठ डिमरी, मनमोहन डिमरी, विकास डिमरी, अनिल डिमरी, राकेश डिमरी, भगवती प्रसाद डिमरी, विशालमणी, चन्द्रमोहन डिमरी, प्रशांत डिमरी, सुशांत डिमरी, रोहित डिमरी, रमेश डिमरी सहित सैकड़ों की संख्या में भक्त मौजूद थे।

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