केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भटके चार युवकों को एसडीआरएफ ने किया रेस्क्यू

रुद्रप्रयाग। केदारनाथ यात्रा के दौरान शॉर्टकट अपनाने की एक बड़ी भूल चार युवकों की जान पर भारी पड़ सकती थी, लेकिन एसडीआरएफ की तत्परता, साहस और कुशल रेस्क्यू अभियान ने संभावित हादसे को टाल दिया। घने अंधेरे, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और गहरी खाइयों के बीच फंसे चार यात्रियों को एसडीआरएफ ने सुरक्षित बाहर निकालकर मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की। सोमवार देर रात करीब 10ः35 बजे कंट्रोल रूम रुद्रप्रयाग से एसडीआरएफ पोस्ट लिनचोली को सूचना मिली कि केदारनाथ पैदल मार्ग पर चार युवक मुख्य ट्रैक छोड़कर शॉर्टकट के रास्ते निकल गए और रास्ता भटककर नदी के दूसरे किनारे सुनसान क्षेत्र में फंस गए हैं। चारों युवक अंधेरे और जंगल के बीच सहायता के लिए पुकार लगा रहे थे तथा भय और असुरक्षा के माहौल में घंटों से फंसे हुए थे।
सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल भारत सिंह और हेड कांस्टेबल मोहन सिंह के नेतृत्व में एसडीआरएफ की टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ तत्काल रवाना हुई। टीम ने सबसे पहले मोबाइल फोन के माध्यम से यात्रियों से संपर्क स्थापित कर उनकी संभावित लोकेशन ट्रेस की और उन्हें हिम्मत बनाए रखने के लिए लगातार मार्गदर्शन दिया।
रात्रि का घना अंधेरा, सघन झाड़ियां, खतरनाक ढलान और दुर्गम पहाड़ी रास्ते रेस्क्यू अभियान में बड़ी चुनौती बने रहे। बावजूद इसके एसडीआरएफ जवानों ने अपने विशेष आपदा प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और अदम्य साहस का परिचय देते हुए कठिन परिस्थितियों में सर्च ऑपरेशन चलाया। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम ने चारों युवकों को सुरक्षित खोज निकाला और उन्हें मुख्य पैदल मार्ग तक पहुंचाया।
रात्रि अधिक होने और आगे का सफर जोखिमपूर्ण होने के कारण सभी यात्रियों को सुरक्षा की दृष्टि से लिनचोली में ही रात्रि विश्राम कराया गया। राहत की बात यह रही कि चारों यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को कोई चोट नहीं आई। रेस्क्यू किए गए यात्रियों में साहिल कुमार (20 वर्ष), सुजीत कुमार (18 वर्ष), हिमांशु (24 वर्ष) निवासी वैशाली, बिहार तथा रूपेश (17 वर्ष) निवासी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश शामिल हैं। एसडीआरएफ ने यात्रियों से अपील की है कि केदारनाथ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के शॉर्टकट या अनधिकृत रास्तों का प्रयोग न करें तथा केवल निर्धारित पैदल मार्ग का ही उपयोग करें। थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। एसडीआरएफ का यह सफल रात्रिकालीन रेस्क्यू अभियान एक बार फिर साबित करता है कि उत्तराखंड की आपदा राहत टीम हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए चैबीसों घंटे तत्पर है।

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