गीता वाचन में निखरी नन्हीं प्रतिभाएं, 48 बच्चों ने दिखाया आत्मविश्वास, श्लोकों की गूंज से आध्यात्मिक हुआ माहौल
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देहरादून। श्री सत्य साईं सेवा संगठन उत्तराखंड द्वारा देहरादून में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित गीता रेसिटेशन कॉन्टेस्ट (गीता श्लोक वाचन प्रतियोगिता) में 6 से 16 वर्ष आयु वर्ग के नन्हे प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास से सभी का मन मोह लिया। बच्चों ने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का शुद्ध, सस्वर एवं भावपूर्ण वाचन कर कार्यक्रम स्थल को आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर कर दिया। मधुर वाणी में गूंजते गीता के श्लोकों ने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।
प्रतियोगिता में 14 विद्यालयों के 44 छात्र-छात्राओं तथा बाल विकास वर्ग के चार बच्चों सहित कुल 48 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास, अनुशासन और भाव के साथ श्लोकों का उच्चारण करते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और संस्कारों की सुंदर झलक प्रस्तुत की। तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया मूल्यांकन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों का मूल्यांकन तीन सदस्यीय निर्णायक मंडल ने किया। डॉ. हरिचंद्र, डॉ. अनंतमणि एवं डॉ. राम विनय सिंह ने श्लोकों के उच्चारण, शुद्धता, भाव, लय एवं प्रस्तुति के विभिन्न मानकों के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। दोनों वर्गों में प्रतिभाओं ने हासिल किए स्थान
प्रतियोगिता को दो वर्गों में विभाजित किया गया। प्रथम वर्ग में साईं ग्रेस अकैडमी, ईस्ट नाथुवाला की भावना रावत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। केंद्रीय विद्यालय आईटीबीपी के सारस डिमरी द्वितीय तथा दून ब्लॉसम स्कूल के शौर्य भारती तृतीय स्थान पर रहे।
द्वितीय वर्ग में न्यू दून ब्लॉसम स्कूल की आराध्या मधवाल ने प्रथम स्थान हासिल किया। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर-1, हाथीबड़कला की गविता ने द्वितीय तथा शिवांश चित्रांश ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विद्यालयों की सामूहिक उपलब्धि में न्यू दून ब्लॉसम स्कूल प्रथम, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर-1, हाथीबड़कला द्वितीय तथा दून ब्लॉसम स्कूल तृतीय स्थान पर रहे। बच्चों को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना उद्देश्य
कार्यक्रम के सफल आयोजन का श्रेय डॉ. श्रीमती लता सिंघल एवं उनकी पूरी टीम को दिया गया। आयोजन का उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान, नैतिक मूल्यों एवं श्रीमद्भगवद्गीता के प्रति रुचि विकसित करना रहा। प्रतियोगिता ने बच्चों को मंच प्रदान करने के साथ ही उन्हें अपनी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया।
समापन अवसर पर कर्नल योगेंद्र सिंह (स्टेट प्रेसिडेंट) ने निर्णायक मंडल, प्रतिभागी बच्चों, विजेताओं, सम्मानित सदस्यों एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों में संस्कार, आध्यात्मिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता विकसित करके ही एक बेहतर एवं संस्कारवान समाज की नींव रखी जा सकती है।
उन्होंने समाज के सभी वर्गों से ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में कैप्टन अजय स्वरूप (स्टेट वाइस प्रेसिडेंट), डॉ. श्रीमती लता सिंघल (स्टेट स्पिरिचुअल कोऑर्डिनेटर), मामचंद (स्टेट एजुकेशन कोऑर्डिनेटर-जेंट्स), शालिनी स्वरूप (ज्वाइंट स्टेट एजुकेशन कोऑर्डिनेटर-लेडीज), सपना थापा (स्टेट सेवा कोऑर्डिनेटर-लेडीज), नीमा जोशी (स्टेट बाल विकास कोऑर्डिनेटर), हांडा, वरिष्ठ श्रद्धालु डॉ. सिंघल, एच.पी. खली तथा समिति के संयोजक राजीव दुबे सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे। गीता के संदेश से संस्कारवान पीढ़ी का संकल्प गीता श्लोक वाचन प्रतियोगिता ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ बच्चों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। नन्हे प्रतिभागियों की शुद्ध वाणी, आत्मविश्वास और उत्साह ने आयोजन को यादगार बना दिया और संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण का संदेश दिया।
