श्रद्धा पूर्वक मनाया गुरु हरगोबिंद साहिब जी का 431वां पावन प्रकाश पर्व

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देहरादून। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, आढ़त बाजार में आयोजित कार्यक्रम में नितनेम के पश्चात नरेंद्र सिंह ने आसा की वार का शब्द गायन किया, बीबी भानी जत्थे की स्त्रियों ने सुखमनी साहिब का पाठ किया,हजुरी रागी भाई जनक सिंह जी ने ‘वड्डा मेरा गोविन्द अगम अगोचर’ का शब्द गायन किया। हैड ग्रंथी ज्ञानी शमशेर सिंह ने कहा कि गुरु हरगोबिंद साहिब का जीवन एक बड़े योद्धा के रूप में व परोपकारी वाला रहा है मीरी -पीरी की दो तलवारें पहन कर गुरु जी ने धर्म और राजनीति का सुमेल किया।गुरुद्वारा साहिब में चल रहे गुरमुखी सिखलाईं का समापन 25 जून को हुआ जिसमें प्रतिभागियों एवं अध्यापिकाओं को पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम में विशेष रूप से आऐ दरबार साहिब, अमृतसर के हजुरी रागी भाई वरिंदर सिंह जी ने शब्द “पंज प्याले पंज पीर छटम पीर बैठा गुर भारी” का शब्द गायन किया सस
गुरुद्वारा के प्रधान स.गुरबक्श सिंह राजन ने प्रकाश पर्व की संगतों को बधाई दी। गुरुद्वारा के महासचिव स. गुलजार सिंह जी ने की 12 जुलाई को सिख सेवक जत्थे के द्वारा गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में गुरु हरगोविंद साहिब जी के प्रकाश पर्व को समर्पित समागम होगा जिसमें दरबार साहिब के हजुरी रागी भाई अमनदीप सिंह जी संगत को कीर्तन श्रवण कराने पहुँचेंगे। गुरू महाराज जी का आशीर्वाद लेने पहुँचे श्री अर्चित डावर को समर्पित चिन्ह व शाल देकर सम्मानित किया। मंच का संचालन करते हुए स. दविंदर सिंह भसीन ने आने वाले कार्यक्रमों में संगतों को सहयोग देने की बेनती की। सरबत के भले की अरदास हैड ग्रंथी भाई शमशेर सिंह जी ने की गई। उपरांत संगत ने मिस्से प्रशादे-लस्सी-प्याज-मक्खन का लंगर छका। इस अवसर पर गुरुद्वारा के प्रधान स.गुरबखश सिंह राजन, महासचिव गुलजार सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमिंदर सिंह छाबड़ा, उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी, मनजीत सिंह, कोषाध्यक्ष
दविंदर सिंह भसीन, सतनाम सिंह, दलबीर सिंह कलेर, मनोहर सिंह, अरविन्दर सिंह आदि कार्यक्रम को सुचारु रूप से चलने में सहयोग प्रदान कर रहे थे।

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