उत्तराखण्ड में थमने का नाम नही ले रहा एसआईआर का घमासान
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देहरादून। उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसे लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि 1.07 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने को लेकर आपत्तियां लगाई गई हैं। इसी मामले को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में भारत निर्वाचन आयोग के बाहर धरना दिया था। दिल्ली में कांग्रेस के धरने के बाद उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर कांग्रेस नेताओं को मुलाकात के लिए शुक्रवार को बुलाया गया और उनकी समस्याओं को सुना गया।
कांग्रेस का आरोप है कि एसआईआर में न सिर्फ आम जनता के नामों को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, बल्कि खुद उनके नेताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि उन्हें हैरानी इस बात कि है कि हरिद्वार जिले के पिरान कलियर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद का नाम हटाने के लिए फार्म- 7 के तहत आपत्ति लगा दी गई। इसके बाद ही उत्तराखंड की राजनीतिक सियासत गरमा गई है, जहां एक ओर पहले ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बड़ी संख्या में लगी आपत्तियों को लेकर मुखर नजर आ रही थी, तो वहीं कांग्रेस विधायक का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए लगाई गई आपत्ति के बाद कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। इसीलिए ये मामला दिल्ली तक पहुंच गया। उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात करने के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आश्वासन दिया है कि उनके अधीन जो भी प्रक्रिया चलेगी वो स्वच्छ और निष्पक्ष होगी। ऐसे में वो भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी पर भरोसा कर रहे हैं. फिर भी इस तरह के कई मामले सामने आए हैं, जिस वजह से कांग्रेस नेताओं को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने इस तरह के मामलों को उठाना पड़ रहा है। मनोज रावत की मानें तो उन्हें हैरानी इसी बात की है कि कांग्रेस विधायक फुरकान अहमद तीन बार के विधायक हैं, फिर भी उनके नाम पर फॉर्म 7 की आपत्ति स्वीकार की जाती है। इसका सीधा मतलब यही है कि चुनाव आयोग के अधिकारी खासकर ईआरओ स्तर पर नियम 17 के तहत तहकीकात नहीं की गई है. इस तरह के हजारों मामले सामने आए हैं।
मनोज रावत ने यह भी कहा कि वो अपने पूरे होशोहवास में ये आरोप लगा रहे हैं कि ये कोई गिरोह है, जिसमें कुछ अधिकारी शामिल हैं और उन अधिकारियों के पास विशेष वर्ग और विशेष जाति के वोटरों का डाटा है। ये अधिकारी ही उस रिकॉर्ड को आपत्तिकर्ताओं को दे रहे हैं। एक तरह के कहा जा सकता है कि वोट चोर और वोट काटू गिरोह पूरे उत्तराखंड में सक्रिय है। खास कर तीन जिलों हरिद्वार, नैनीताल और उधमसिंह नगर में ये गिरोह पूरी तरह से सक्रिय है।
