उपद्रवियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चक्का जामः मोहित डिमरी

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रुद्रप्रयाग। युवा नेता मोहित डिमरी ने कर्णप्रयाग और नगरासू क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि इन घटनाओं ने उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति और सामाजिक सौहार्द को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है तथा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय राजनीतिक दबाव में निर्णय लिए गए हैं।
जिला मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कहा कि युवा नेता मोहित डिमरी ने कहा कि कर्णप्रयाग में स्थानीय युवकों के साथ हुई कहासुनी के बाद कुछ निहंग सिखों द्वारा तलवारों से हमला कर युवकों को घायल किया गया, जो अत्यंत गंभीर मामला है। इसके बाद नगरासू गुरुद्वारे में कुछ निहंगों द्वारा हथियारों के बल पर कब्जा करने, तोड़फोड़ करने, स्थानीय सेवादारों को परेशान करने तथा कई दिनों तक तनावपूर्ण माहौल बनाए रखने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित उपद्रवियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के बजाय स्थानीय युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले को चमोली एवं रुद्रप्रयाग से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच गलत संदेश गया है और सरकार की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।
डिमरी ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी धर्म या समुदाय से नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सिख समाज का सदैव सम्मान रहा है और राज्य के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। लाखों श्रद्धालु हर वर्ष श्रद्धा और अनुशासन के साथ हेमकुंड साहिब की यात्रा करते हैं, लेकिन कुछ उग्र प्रवृत्ति के तत्व समय-समय पर विवाद और तनाव की स्थिति पैदा करते रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कर्णप्रयाग की घटना में किसी युवक की जान चली जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। घायल पक्ष के बजाय स्थानीय युवकों पर मुकदमा दर्ज करने का आधार क्या था तथा कथित हमलावरों की निष्पक्ष जांच और चिकित्सीय परीक्षण क्यों नहीं कराया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि मामले को स्थानीय पुलिस से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
मोहित डिमरी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार से मांग की कि स्थानीय युवकों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को तत्काल निरस्त कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। तलवारों से हमला करने, तोड़फोड़ और उपद्रव फैलाने के आरोपित निहंगों के विरुद्ध नामजद मुकदमा दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर उत्तराखंड पुलिस पंजाब जाकर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करे। उन्होंने उत्तराखंड में यात्रा के दौरान हथियारों के प्रदर्शन और उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम बनाने, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने तथा कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग की घटनाओं की जांच संबंधित जिलों की पुलिस और प्रशासन को सौंपकर पारदर्शी जांच कराने की मांग भी की। साथ ही उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गुरुद्वारों के संचालन और प्रबंधन में स्थानीय सिख समुदाय की भूमिका को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो जनता के सहयोग से लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन तथा चक्का जाम जैसे कार्यक्रमों पर विचार किया जाएगा।
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शांति, भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की भूमि है। यहां सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान किया जाता है, लेकिन कानून को चुनौती देने वाली किसी भी हिंसक या उग्र गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह निष्पक्ष कार्रवाई कर जनता के न्याय, सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा उत्तराखंड को किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक राजनीति का अखाड़ा बनने से बचाए।

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