स्वतंत्रता दिवस पर राज्यपाल ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं

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देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने देश एवं प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी अपने संदेश में राज्यपाल ने स्वतंत्रता संग्राम के सभी ज्ञात-अज्ञात वीर सेनानियों, अमर शहीदों और राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और अदम्य साहस के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में अपने सपनों को साकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को नए संकल्प और समर्पण के साथ निभाने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब तक विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्व को नई दिशा देने वाले भारत के निर्माण का संकल्प साकार करना हमारा लक्ष्य होगा। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हमें तीन प्रमुख संकल्पों-‘राष्ट्र प्रथम’, ‘नशामुक्त भारत’ और ‘2047 तक विकसित भारत’ को अपने व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है। यही संकल्प स्वतंत्रता के अगले चरण में भारत की प्रगति की आधारशिला बनेंगे।
राष्ट्र प्रथम-हर नागरिक का सर्वोच्च संकल्प
राज्यपाल ने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना केवल किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देश के प्रति निष्ठा, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता की रक्षा, सभी राष्ट्र प्रथम की भावना के ही स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना होगा।
2047 का विकसित भारत-आज के संकल्पों से बनेगा भविष्य
राज्यपाल ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा भारत बनाने का संकल्प है जो ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, साइबर टेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और अन्य उभरते क्षेत्रों में भारत के युवाओं के लिए अपार अवसर हैं। हमें नई पीढ़ी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा। शिक्षा में शोध, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत की युवा शक्ति को वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करना समय की आवश्यकता है।
नशामुक्त युवा-सशक्त भारत की पहचान
राज्यपाल ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की शक्ति को भी कमजोर करता है। भारत की युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए युवाओं को नशे से दूर रखना और उन्हें शिक्षा, खेल, कौशल, नवाचार, स्टार्टअप तथा राष्ट्र निर्माण के अवसरों से जोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि ‘नशामुक्त भारत’ केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार, विद्यालय, विश्वविद्यालय, अभिभावक, शिक्षक और युवा का साझा संकल्प होना चाहिए। राज्यपाल ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी ऊर्जा और प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण में लगाएं तथा स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने साथियों को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करें।
उत्तराखण्ड की संभावनाओं को अवसरों में बदलने का समय
राज्यपाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखण्ड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। देवभूमि की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक एवं जैविक कृषि, औद्यानिकी, हनी, अरोमा, वेलनेस, साहसिक पर्यटन और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में उत्तराखण्ड के पास अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि इन संभावनाओं को रोजगार और आर्थिक अवसरों में बदलने के लिए नवाचार, तकनीक और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करना होगा। स्थानीय उत्पादों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय उद्यमों को वैश्विक बाजार से जोड़ना विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। चारधाम, मानसखण्ड और हेमकुंड साहिब के साथ-साथ साहसिक, आध्यात्मिक, वेलनेस और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देकर उत्तराखण्ड को एक प्रमुख ‘ऑल सीजन टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा को मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया इस दिशा में उत्साहजनक संकेत है।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहाड़ की महिलाओं ने कठिन परिस्थितियों में परिवार, समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। महिला स्वयं सहायता समूहों, उद्यमिता, कौशल विकास और शिक्षा के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और युवाओं को आधुनिक कौशल उपलब्ध कराकर हम न केवल वर्तमान को मजबूत करेंगे, बल्कि आने वाले भारत की नींव भी तैयार करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड वीरों की भूमि है। यहां के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया है। सैन्य धाम का निर्माण हमारे वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना उत्तराखण्ड की मिट्टी और संस्कृति में रची-बसी है। सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों से लेकर खेतों में परिश्रम करने वाले किसानों, शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे शिक्षकों, देश के भविष्य को गढ़ रहे युवाओं और समाज को आगे बढ़ाने वाली मातृशक्ति तक, हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्यपाल ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर हम सभी मिलकर ‘‘राष्ट्र प्रथम’ को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएं, ‘नशामुक्त भारत’ के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं और ‘भारत को 2047’ तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में अपना योगदान दें।

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